राधे - राधे ॥आज का भगवद् चिंतन॥ 31-07-2020

राधे - राधे ॥आज का भगवद् चिंतन॥
             31-07-2020
          श्रावण मास शिव तत्व
भगवान शिव को प्रलय अथवा संहार का देव भी कहा जाता है। प्रलय का अर्थ केवल विनाश नहीं होता अपितु जो अनावश्यक है , जो अतिरिक्त है, जो अनुपयोगी है उसका नाश कर देना अथवा असंतुलित को संतुलित करना ही प्रलय कहा जाता है। 

फल नहीं सूखेगा तो बीज कैसे उत्पन्न हो पायेगा और यदि बीज नहीं उत्पन्न होगा तो नये पेड़ पौधों की उत्पत्ति कैसे संभव हो पायेगी..? इसलिए एक हरे पेड़ की उत्पत्ति के लिए एक फल को सूखना अथवा मिटना ही पड़ेगा। इसका सीधा सा अर्थ यह हुआ कि एक नयें सृजन के लिए एक पुराने को अपना अस्तित्व मिटाना ही पड़ेगा।

भगवान महादेव की प्रलय लीला का सीधा सा अर्थ ही यह है कि जीवन में जो अनुपयोगी अथवा अनावश्यक हो उसका संहार कर देना ही श्रेष्ठ है। जीवन के दुर्गुणों, विकृतियों, दुर्भावनाओं का संहार अथवा प्रलय करना ही दैवीय जीवन की उत्पत्ति का एक मात्र उपाय है।

जीवन की श्रेष्ठता, दिव्यता और शांति के लिए जीवन संतुलित होना चाहिए। और जीवन के संतुलन के लिए अनावश्यक और अनुपयोगी का संहार करना तो हमें भोलेनाथ से सीखना ही चाहिए.. 


            संजीव कृष्ण ठाकुर जी 
                श्रीधाम वृन्दावन
     
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